Friday, 10 August 2012


हुआ दूर अँधियारा
टूटा मृगतृष्ण
हो रहा जग सारा
......कृष्ण-कृष्ण
मुझमे कृष्ण
तुझमे कृष्ण
सत्-चित्-आनंद
.......कृष्ण-कृष्ण

Tuesday, 24 July 2012

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ज़िन्दगी यूँ न बस साँसों की रवानी होती
तू होती तो एक अच्छी  सी कहानी होती
ख्वाब होते , ख्वाहिशे होती ,
............................यादों की निशानी होती
तू होती तो एक अच्छी सी कहानी होती
छेड़ कर किस्सा , फिर अपनी यादों का ,
बातें कुछ नई , तो कुछ पुरानी होती
शाम-ऐ -तन्हाई  में संग,
......................... कुछ वक्त बितानी होती ,
कुछ तुमको कहनी होती, कुछ हमको सुनानी होती
होता अपना भी ख्वाबो का आशियाना कहीं ,
प्यार के वादों से अपनी दुनियां सजानी होती
तू होती तो एक अच्छी  सी कहानी होती
       
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                 ♥╬ Avnish ╬♥

Thursday, 12 July 2012

जब भी मिलता है मुझे,
वो नया सा लगता है
उसके चेहरे पे हर बार एक,
नया  चेहरा सा लगता है
वो मिलता है, हँसता है,
बातें करता है ....
पर जाने क्यूँ  ये सब कुछ
अब झूठा सा लगता है 
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बोझ  सी   लगने   लगी है   जिंदगी
खुद  ही  को  ठगने  लगी है जिंदगी
राख  ही  राख  बची  थी  सीने  में ..
तेरी यादों में फिर सुलगने लगी है जिंदगी
ऐ दुनियां अब कोई बुझौअल न बुझा ..
तेरी हर पहेली को समझने लगी है जिंदगी
हकीकत की तल्ख़ ज़मीं से जब वास्ता हुआ
कांच   सी   चुभने   लगी   है    जिंदगी
बस साँसों की आवा-जाहि को कैसे जिंदगी कह दूँ
अब  जिंदगी से खुद ही ,, उबने लगी है जिंदगी

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Tuesday, 22 May 2012


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जीवन क्यूँ होता तार-तार ,
फूट रही क्यूँ  कटु  झंकार |
संस्कृति के वक्छ्स्थल पर ,
आधुनिकता का कैसा प्रहार |

मातृत्व रोती जार-जार,
लक्छ्य धूमिल, पथ अल्क्छित,
कर्म विचलित बार-बार |

रूठा शर्म, शील- लज्जा ,
रूठा जीवन का श्रृंगार |
स्वाँस-स्वाँस  सब छूट रहा ,
जीवन का डोर ये टूट रहा |
क्या तेरा , क्या मेरा यहाँ ,
कैसा हैं ये अधिकार |

जीवन क्यूँ होता तार-तार ,
फूट रही क्यूँ कटु  झंकार |

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Sunday, 13 May 2012


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के इन निगाहों में जाने किसकी तलाश हैं ,
न जाने वो दूर है मुझ से या आस-पास हैं ...
या फिर मेरी नज़रों ने उसे पहचाना नही ,
या फिर उसके दिल को भी कुछ अहसास है ...
आजाओं मेरे पास ,सुन कर दिल की आवाज़
तुम बिन अब जिंदगी के हर लम्हें उदास है .
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माँ ......................
तुम जीवन का अहसास हो ,
काँटों से भरे जीवन में ,
तुम खुशियों का अहसास हो..
तुम प्रेम सुधा, निर्मल वसुधा,
तुम स्वासों का उच्छ्वास हो.
मेरे साथ सदा रहने वाली
तुम अन्नंत आकाश हो..
तुम संवेदना की धुरी
तुम सृष्टि का परम विकाश हो ..
तुम करुना की परम मूर्ति ,
तुम जीवन संस्कारों की पूर्ति ,
तुम प्राण वायु इस धरा की,
तुम रूह में चलती स्वास हो..