Thursday, 11 December 2014

बहुत रोये है तनहा होके
बहुत सिस्के है रातों में
क्यूँ आ गये ऐ मोहब्बत
तेरी इन मीठी बातो में

मेरी आँखों के कोड़ो में
समन्दर भर दिया तूने
मेरे इस हाले दिल का बहुत
तमाशा कर दिया तूने

कोई ख्वाहिस नही की थी
न कोई ख्वाब माँगा था
तेरा बस हाथ माँगा था
मैंने अपने हाथो में
बहुत रोये है तन्हा होके
बहुत सिस्के है रातो में
क्यूँ आ गये ऐ मोहब्बत
तेरी इन मीठी बातो में
......@अवनीश
तुझसे बिछर के खुद को
          खोया नही मैंने
कौन कहता है की तन्हाई में
           रोया नहीं मैंने
वो हर लफ्ज़ जो ख़त पे
        तूने लिखें थे कभी
उन लफ्जों को अश्कों से
         भिगोया नही मैंने
कौन कहता है की तन्हायी में
           रोया नही मैंने

............ अवनीश 

Saturday, 6 December 2014


बहुत कोशिस की तुम्हे भुलाने की ,
तुम्हारे यादों से दूर जाने की ,
तेरे बिना अपनी दुनियां बसाने की |
पर ऐसा न हो पाया ,
ना मुस्करा पाया ना रो पाया ...
हथेलिओं में मेरे शायद,
तेरी लकीर नहीं थी
तुझको पाने की शायद ,
मेरी तकदीर नहीं थी |
बहुत कोशिस की हाथो में वो लकीर बनाने की,
अपने तकदीर से तेरी तकदीर को मिलाने की |
पर ऐसा ना हो पाया ,
ना मुस्करा पाया ना रो पाया ....
वो वक़्त कितने प्यारे थे ,
जो संग तुम्हारे गुजारे थे ,
वही तो जीने के सहारे थे |
बहुत कोशिस की तेरा हर ख़त जलाने की ,
तेरी हर निशानियाँ दिल से मिटाने की |
पर ऐसा कहाँ हो पाया ,
ना मुस्कुरा पाया ना रो पाया ....
"@avii "

Sunday, 23 November 2014

ज़िन्दगी है, सफर है, तन्हाई है,
मंज़िल है भी या सिर्फ रूश्वाई है।
पलके है,कुछ ख्वाब है, आंशु है
दर्द ने भी बड़ी लम्बी ऊम्र पायी है।
@ अवनीश.