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बोझ सी लगने लगी है जिंदगी
खुद ही को ठगने लगी है जिंदगी
राख ही राख बची थी सीने में ..
तेरी यादों में फिर सुलगने लगी है जिंदगी
ऐ दुनियां अब कोई बुझौअल न बुझा ..
तेरी हर पहेली को समझने लगी है जिंदगी
हकीकत की तल्ख़ ज़मीं से जब वास्ता हुआ
कांच सी चुभने लगी है जिंदगी
बस साँसों की आवा-जाहि को कैसे जिंदगी कह दूँ
अब जिंदगी से खुद ही ,, उबने लगी है जिंदगी
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बोझ सी लगने लगी है जिंदगी
खुद ही को ठगने लगी है जिंदगी
राख ही राख बची थी सीने में ..
तेरी यादों में फिर सुलगने लगी है जिंदगी
ऐ दुनियां अब कोई बुझौअल न बुझा ..
तेरी हर पहेली को समझने लगी है जिंदगी
हकीकत की तल्ख़ ज़मीं से जब वास्ता हुआ
कांच सी चुभने लगी है जिंदगी
बस साँसों की आवा-जाहि को कैसे जिंदगी कह दूँ
अब जिंदगी से खुद ही ,, उबने लगी है जिंदगी
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Awesome
ReplyDeletethank u :)
DeleteThank U Shashi :)
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