...... बचपन ......
----------------------सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को
दिल में एक टीस से उठती हैं
और छलक परता हैं,
आँखों से वही नमकीन सा पानी
जो सूखता है तो
गालो पे दाग सा रह जाता है,
लकीर बन के....
सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को....
लबों पे एक आह से उठती है..
वो वक्त कितना सुहाना था...
वेफिक्र से हम जिन्हें
जी गए.......
चोट लगने पर
खुल के रो लिया तो करते थे..
बहते आंसुओं को, माँ की आँचल से
पोंछ लिया करते थे..
किसे परवाह थी,
खोने की, पाने की
जो मिल गया उसी में खुश हो जाते
और जो न मिला
उस का गम भी न था....
सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को..
वेफिक्र से जिन्हें जी गए..
क्यू जी भर के जिया नही........??
.........by avnish gautam
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