Monday, 23 September 2013

मेरी आँखों को या तो समंदर कर दे..
या मेरा दिल..... ए ख़ुदा तू पत्थर कर दे.।
मुझको मेरी शर्तों पे अब तो जीने दे.…
या मेरी मौत की तारीख ही मुक़र्रर कर दे।
न खिलें फूल गुंचा-ए- गुल वीरान रहे ….
मेरी हसरतों को पनप ने दे या बंज़र कर दे।


के हर बरस क्यूँ करें कुछ मौषमों का इंतेज़ार ….
इन ख्वाहिशों को फिज़ा या पतझर कर दे।
मेरी आँखों को या तो समंदर कर दे..
या मेरा दिल..... ए ख़ुदा तू पत्थर कर दे.।

@ ... अवनीश 

Monday, 11 February 2013

♥•♥´¨`♥•.¸¸.•♥´¨`♥•♥´♥•♥ 
Happy Valentine Day

इन आँखों से तुम्ही कहो
अश्क क्यूँ न बहे.......
हिज़्र के इन लम्हों को
तुम्ही कहो कैसे सहे.....!

इतनी नासमझ भी तो
नहीं हो मेरी जान तुम..!!
फिर कहें भी तुम्हे तो
आखिर क्या कहें....
के तुम्हारी मोहब्बत से,
रौशन है ज़िन्दगी मेरी..
फिर तुम्हारे बगैर
तुम्ही बताओ हम कैसे रहे..
ये  दूरीयां अब  इतनी
अच्छी नही
हो जाओ आज करीब,
बहुत करीब इस दिल के ..
आजाओ आज तो कम से कम
मेरी बाँहों में....
कहना है आज दिल से तुम्हे,
Happy Valentine Day

ये हवाँ सुने, ये फ़ज़ा सुने..
सुने ये चाँद तारे .........
कहना है आज दिल से तुम्हे,
Happy Valentine Day
♥•♥´¨`♥•.¸¸.•♥´¨`♥•♥´♥•♥ 




Wednesday, 2 January 2013


जब मैं उस से मिला तो मुझे नही पता था ,
के वो हमारी.....
आखिरी मुलाकात थी |
उस आखिरी मुलाकात में ,,
जाते हुए आखिरी बार ,
..उसने यही कहा ,,
उसने कहा की.............,

मुझे भुला देना ,
शाख पे खिले सब
... फूल गिरा देना |
जो ख़त लिखे हैं ,
कभी प्यार में तुमको...
जाकर सब अपने हाथों से ,
.......जला देना ||

मैं किसी और की ,
अब होने चलीं ..
तुम भी दिल से अब ,
...मेरी यादों को मिटा देना |
मुझसे मिलने की अब ,
न कोई कोसीस करना...
हो सके तो तुम भी ,
अपनी दुनियां बसा लेना ||

हमने कहा की  ....
हमने तो तेरी यादों से ही ,
अपनी दुनिया बसा लीं हैं....
हर मुस्कराहट में अपने ,
हज़ारों गम छुपा लीं है |
बहुत कोसीस की पर ,
मर भी तो नही पाया...
ना जाने कितनो से आखिर ,
मैंने जीने की दुआं लीं है ||
पर गैरों के साथ तुमकों,,
तुम्हारी ज़िन्दगी मुबारक..
हमने तो अपने मौत की ,,
..........बरसीं भी मना लीं है

________@ अवनीश गौतम "





Friday, 7 December 2012

कोई तो आए, आकर कुछ
                    तन्हाई तो बांटे
के हम किस खंज़र किस तलवार से,
                   इस रात को काटे

Wednesday, 15 August 2012


देश क्यूँ आज़ाद हुआ..?
गाँधी जी ने देश को क्यूँ आज़ाद कराया ..
क्या सिर्फ इस लिए की नया नोट चलाएँगे
और उसपे अपनी फोटो लगाएँगे..
-
देश क्यूँ आज़ाद हुआ..?
क्या नेताओं ने मिलके देश को इसलिए आज़ाद कराया..
के अपनी सरकार चलाएँगे..!!
और सारा पैसा स्वीस बैंक में जमा कराएँगे ..!!
आश्वासनों से गरीबों की पेट भरेंगे..!!
और वोट बैंक की राजनीति कर ,, हम मौज करेंगे..!!
-
कही आतंकवाद ,, कहीं माओवाद
अब किस से करे यहाँ फरियाद
क्यूँ सहमे डरे से लोग यहाँ
और जीने की लाचारी
भूख - गरीबी और बेरोजगारी
उसपे ये भ्रस्टाचारी

छोड़ो...हमलोगों को क्या लेना..
हम क्यूँ इस सवालों में उलझे ..!!
अपने पास और भी काम हैं ..

चलो  झंडा फहराते हैं
और राष्ट्रगान गाते हैं ..
 ..:-)

....................अवनीश गौतम

Friday, 10 August 2012


...... बचपन ......

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सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को
दिल में एक टीस से उठती हैं
और छलक परता हैं,
आँखों से वही नमकीन सा पानी
जो  सूखता है तो
गालो पे दाग सा रह जाता है,
लकीर बन के....

सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को....
लबों पे एक आह से उठती है..
वो वक्त कितना सुहाना था...
वेफिक्र से हम जिन्हें
जी गए.......
चोट लगने पर
खुल के रो लिया तो करते थे..
बहते आंसुओं को, माँ की आँचल से
पोंछ लिया करते थे..
किसे परवाह थी,
खोने की, पाने की
जो मिल गया उसी में खुश हो जाते
और जो न मिला
उस का गम भी न था....

सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को..
वेफिक्र से जिन्हें जी गए..
क्यू जी भर के जिया नही........??
.........by avnish gautam

दिल चाहे ,जब चाहे,
जो चाहे करना..
पर ये दुनिया है यारो,
इसपे भरोसा मत करना...
फिर झूठे ख्वाब सजायेंगे,
फिर झूठी आस दिलाएंगे...
फिर दिल को दिलाशा देकर 
इस दिल को समझाएंगे,
के चाहत में किसी के ना,
हद से गुजरना ...
ये दुनियाँ है यारो,
इसपे भरोसा मत करना