Wednesday, 2 January 2013


जब मैं उस से मिला तो मुझे नही पता था ,
के वो हमारी.....
आखिरी मुलाकात थी |
उस आखिरी मुलाकात में ,,
जाते हुए आखिरी बार ,
..उसने यही कहा ,,
उसने कहा की.............,

मुझे भुला देना ,
शाख पे खिले सब
... फूल गिरा देना |
जो ख़त लिखे हैं ,
कभी प्यार में तुमको...
जाकर सब अपने हाथों से ,
.......जला देना ||

मैं किसी और की ,
अब होने चलीं ..
तुम भी दिल से अब ,
...मेरी यादों को मिटा देना |
मुझसे मिलने की अब ,
न कोई कोसीस करना...
हो सके तो तुम भी ,
अपनी दुनियां बसा लेना ||

हमने कहा की  ....
हमने तो तेरी यादों से ही ,
अपनी दुनिया बसा लीं हैं....
हर मुस्कराहट में अपने ,
हज़ारों गम छुपा लीं है |
बहुत कोसीस की पर ,
मर भी तो नही पाया...
ना जाने कितनो से आखिर ,
मैंने जीने की दुआं लीं है ||
पर गैरों के साथ तुमकों,,
तुम्हारी ज़िन्दगी मुबारक..
हमने तो अपने मौत की ,,
..........बरसीं भी मना लीं है

________@ अवनीश गौतम "





Friday, 7 December 2012

कोई तो आए, आकर कुछ
                    तन्हाई तो बांटे
के हम किस खंज़र किस तलवार से,
                   इस रात को काटे

Wednesday, 15 August 2012


देश क्यूँ आज़ाद हुआ..?
गाँधी जी ने देश को क्यूँ आज़ाद कराया ..
क्या सिर्फ इस लिए की नया नोट चलाएँगे
और उसपे अपनी फोटो लगाएँगे..
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देश क्यूँ आज़ाद हुआ..?
क्या नेताओं ने मिलके देश को इसलिए आज़ाद कराया..
के अपनी सरकार चलाएँगे..!!
और सारा पैसा स्वीस बैंक में जमा कराएँगे ..!!
आश्वासनों से गरीबों की पेट भरेंगे..!!
और वोट बैंक की राजनीति कर ,, हम मौज करेंगे..!!
-
कही आतंकवाद ,, कहीं माओवाद
अब किस से करे यहाँ फरियाद
क्यूँ सहमे डरे से लोग यहाँ
और जीने की लाचारी
भूख - गरीबी और बेरोजगारी
उसपे ये भ्रस्टाचारी

छोड़ो...हमलोगों को क्या लेना..
हम क्यूँ इस सवालों में उलझे ..!!
अपने पास और भी काम हैं ..

चलो  झंडा फहराते हैं
और राष्ट्रगान गाते हैं ..
 ..:-)

....................अवनीश गौतम

Friday, 10 August 2012


...... बचपन ......

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सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को
दिल में एक टीस से उठती हैं
और छलक परता हैं,
आँखों से वही नमकीन सा पानी
जो  सूखता है तो
गालो पे दाग सा रह जाता है,
लकीर बन के....

सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को....
लबों पे एक आह से उठती है..
वो वक्त कितना सुहाना था...
वेफिक्र से हम जिन्हें
जी गए.......
चोट लगने पर
खुल के रो लिया तो करते थे..
बहते आंसुओं को, माँ की आँचल से
पोंछ लिया करते थे..
किसे परवाह थी,
खोने की, पाने की
जो मिल गया उसी में खुश हो जाते
और जो न मिला
उस का गम भी न था....

सोंचता हूँ जब भी,
गुजरे वक्त को..
वेफिक्र से जिन्हें जी गए..
क्यू जी भर के जिया नही........??
.........by avnish gautam

दिल चाहे ,जब चाहे,
जो चाहे करना..
पर ये दुनिया है यारो,
इसपे भरोसा मत करना...
फिर झूठे ख्वाब सजायेंगे,
फिर झूठी आस दिलाएंगे...
फिर दिल को दिलाशा देकर 
इस दिल को समझाएंगे,
के चाहत में किसी के ना,
हद से गुजरना ...
ये दुनियाँ है यारो,
इसपे भरोसा मत करना 

हुआ दूर अँधियारा
टूटा मृगतृष्ण
हो रहा जग सारा
......कृष्ण-कृष्ण
मुझमे कृष्ण
तुझमे कृष्ण
सत्-चित्-आनंद
.......कृष्ण-कृष्ण

Tuesday, 24 July 2012

      .......♥•♥´¨`♥•.¸¸.•♥´¨`♥•♥........

ज़िन्दगी यूँ न बस साँसों की रवानी होती
तू होती तो एक अच्छी  सी कहानी होती
ख्वाब होते , ख्वाहिशे होती ,
............................यादों की निशानी होती
तू होती तो एक अच्छी सी कहानी होती
छेड़ कर किस्सा , फिर अपनी यादों का ,
बातें कुछ नई , तो कुछ पुरानी होती
शाम-ऐ -तन्हाई  में संग,
......................... कुछ वक्त बितानी होती ,
कुछ तुमको कहनी होती, कुछ हमको सुनानी होती
होता अपना भी ख्वाबो का आशियाना कहीं ,
प्यार के वादों से अपनी दुनियां सजानी होती
तू होती तो एक अच्छी  सी कहानी होती
       
      .......♥•♥´¨`♥•.¸¸.•♥´¨`♥•♥........    
                 ♥╬ Avnish ╬♥