Sunday, 13 May 2012


माँ ......................
तुम जीवन का अहसास हो ,
काँटों से भरे जीवन में ,
तुम खुशियों का अहसास हो..
तुम प्रेम सुधा, निर्मल वसुधा,
तुम स्वासों का उच्छ्वास हो.
मेरे साथ सदा रहने वाली
तुम अन्नंत आकाश हो..
तुम संवेदना की धुरी
तुम सृष्टि का परम विकाश हो ..
तुम करुना की परम मूर्ति ,
तुम जीवन संस्कारों की पूर्ति ,
तुम प्राण वायु इस धरा की,
तुम रूह में चलती स्वास हो..

1 comment:

  1. बहुत अच्छा ... अतिसुंदर ..

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