Monday, 3 February 2025

क़्या लिखूँ....

क्यां लिखूँ  ______

मै लिखुं तो अब क्या लिखुं,, के लिखने को बचा क्या है
दिल टुटा आँखे रोयीं,,  इस से ज्यादा हुआ क्या है ...!!?
संभल कर चलने वाले ही अक्सर, ठोकरों से गिरते हैं
जिंदगी की राहों में जो गिरा ही न हो,, वो संभला क्या हैं..!!?
तरपाना- रुलाना,, सब इनकी फितरत में है सामिल
इश्क की आग में कभी,, जो जला ही न हो वो बुझा क्या हैं..!!?
तू लाख बनालें मनसूबे ,, पूरी करने को अपनी  चाहते
पर इश्क पे भी ज़ोर कहीं ,, किसी का कभी चला क्या हैं..!!?
ये मंदिर ये मस्जिद है ,, बस तेरा- मेरा की ज़िद है
सरहद पे रहने वालों का , तू ही बता खुदा क्या है ..!!?
तू मिटटी है ,मिटटी का ये बदन फिर मिटटी में मिल जाना है
फिर चार पल की जिंदगी में ,, गैर क्या है अपना क्या है..!!?
ना ये मंज़िल है ना ये ठिकाना  हैं,,ये दुनिया तो एक सरायखाना है
ठोकर लगे तो  फिर उठ के चल,, बैठ के यूँ रोता क्या हैं ..!!?
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