आंसुओं की कभी एक बूंद ,
जला के देखिये,
खाड़े पानी में लफ्जों से ,
शक्कर मिला के देखिये|
मिले फुरसत तो आईने में ,
आप भी,
अपनी ही सूरत से कभी,
सूरत मिला के देखिये |
इस जिंदा शहर में लहू ,
बेरंग है सब का,
कभी अपने भी सीने पे,
खंज़र चला के देखिये |
बंद रास्तो में भी कई राह ,
निकल आएँगी ...
दिल से कभी आप भी ,,
दिल मिला के देखिये |
रौशन हो उठेगी आपकी दुनिया ,
खुद -व- खुद ..
कभी गैरों की ज़िन्दगी के भी ,
अंधेरें मिटा के देखिये |
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