तुझसे बिछर के खुद को
खोया नही मैंने
कौन कहता है की तन्हाई में
रोया नहीं मैंने
वो हर लफ्ज़ जो ख़त पे
तूने लिखें थे कभी
उन लफ्जों को अश्कों से
भिगोया नही मैंने
कौन कहता है की तन्हायी में
रोया नही मैंने
खोया नही मैंने
कौन कहता है की तन्हाई में
रोया नहीं मैंने
वो हर लफ्ज़ जो ख़त पे
तूने लिखें थे कभी
उन लफ्जों को अश्कों से
भिगोया नही मैंने
कौन कहता है की तन्हायी में
रोया नही मैंने
............ अवनीश
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