Saturday, 6 December 2014


बहुत कोशिस की तुम्हे भुलाने की ,
तुम्हारे यादों से दूर जाने की ,
तेरे बिना अपनी दुनियां बसाने की |
पर ऐसा न हो पाया ,
ना मुस्करा पाया ना रो पाया ...
हथेलिओं में मेरे शायद,
तेरी लकीर नहीं थी
तुझको पाने की शायद ,
मेरी तकदीर नहीं थी |
बहुत कोशिस की हाथो में वो लकीर बनाने की,
अपने तकदीर से तेरी तकदीर को मिलाने की |
पर ऐसा ना हो पाया ,
ना मुस्करा पाया ना रो पाया ....
वो वक़्त कितने प्यारे थे ,
जो संग तुम्हारे गुजारे थे ,
वही तो जीने के सहारे थे |
बहुत कोशिस की तेरा हर ख़त जलाने की ,
तेरी हर निशानियाँ दिल से मिटाने की |
पर ऐसा कहाँ हो पाया ,
ना मुस्कुरा पाया ना रो पाया ....
"@avii "

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