Tuesday, 4 February 2025

..इस  दौड़ में..

अजब ये रवायत  चली है इस दौड़ में ..
के रश्मे बेमुरव्वत चली है इस दौड़ में  |
शबनम भी अब तिश्नगी में जलते हैं..
अज़ब ये मोहब्बत चली है इस दौड़ में |
तोरते देखा है खुदा की बनायीं रश्मों को ..
के खुदा से भी रकावत चली है इस दौड़ में |
आदमी, आदमी का दुश्मन बना बैठा है ..
ये  कैसी  नफ़रत  चली  है  इस  दौड़  में |
खुदा बनने की खुद चाह किये बैठे  है सब  ..
अपनी-अपनी सब की कुवत चली है इस दौड़ में |
हो चला है अब हर मज़हब खून से लाल यहाँ ..
ये किस खुदा की इबादत चली है इस दौड़ में |

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