..इस दौड़ में..
अजब ये रवायत चली है इस दौड़ में ..
के रश्मे बेमुरव्वत चली है इस दौड़ में |
शबनम भी अब तिश्नगी में जलते हैं..
अज़ब ये मोहब्बत चली है इस दौड़ में |
तोरते देखा है खुदा की बनायीं रश्मों को ..
के खुदा से भी रकावत चली है इस दौड़ में |
आदमी, आदमी का दुश्मन बना बैठा है ..
ये कैसी नफ़रत चली है इस दौड़ में |
खुदा बनने की खुद चाह किये बैठे है सब ..
अपनी-अपनी सब की कुवत चली है इस दौड़ में |
हो चला है अब हर मज़हब खून से लाल यहाँ ..
ये किस खुदा की इबादत चली है इस दौड़ में |
अजब ये रवायत चली है इस दौड़ में ..
के रश्मे बेमुरव्वत चली है इस दौड़ में |
शबनम भी अब तिश्नगी में जलते हैं..
अज़ब ये मोहब्बत चली है इस दौड़ में |
तोरते देखा है खुदा की बनायीं रश्मों को ..
के खुदा से भी रकावत चली है इस दौड़ में |
आदमी, आदमी का दुश्मन बना बैठा है ..
ये कैसी नफ़रत चली है इस दौड़ में |
खुदा बनने की खुद चाह किये बैठे है सब ..
अपनी-अपनी सब की कुवत चली है इस दौड़ में |
हो चला है अब हर मज़हब खून से लाल यहाँ ..
ये किस खुदा की इबादत चली है इस दौड़ में |